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अम्बर से अमृत बरसा,भक्ति रस में डूबा वृन्दावनबाग मंदिर परिसर

अम्बर से अमृत बरसा, भक्ति रस में डूबा वृन्दावनबाग मंदिर परिसर

सागर। शरद पूर्णिमा का त्यौहार जितना आध्यात्मिक है उतना ही वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्व पूर्ण हैं। बुधवार को भक्तिभाव के साथ यह पर्व मनाया गया। वृंदवानवार्ड स्थित श्री देव वृन्दावनबाग मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान के विशेष श्रृंगार का दर्शन लाभ लिया। महाआरती के बाद मावे के लड्डुओं का भोग भगवान को लगाया गया। मंदिर प्रांगण में भजन संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें देर रात तक श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहा।

महंत श्री नरहरि दास जी ने बताया कि आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इस तिथि से शरद ऋतु प्रारंभ होती है, इसलिए इसे शरद पूर्णिमा कहा जाता है। ऐसी मान्यताएं हैं कि प्रेम और कलाओं से परिपूर्ण भगवान कृष्ण ने इसी दिन महारास रचाया था। ज्योतिषविदों के मुताबिक, इस दिन चंद्रमा संपूर्ण सोलह कलाओं से युक्त होता है और चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है. ये अमृतवर्षा जीवन में धन, प्रेम और स्वास्थ्य तीनों का सुख लेकर आती है।

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