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कक्का की चिट्ठी सपने में आई, नींद उड़ाई

कभी न देख पाने से अच्छा है तेरा मास्क लगा आधा चांद देखूं।
हमेशा की दूरी से अच्छी है दो ग़ज़ की दूरी।

कक्का खों मरे 5 साल हो गए आज तक याद तक नैं आई। आदमी ही ऐसे हते बे की कोउ याद काये करे। भगवान बी केत हुइये ईखो बना के गलती करी थी के बुलाकें। मनो कल रात खो सपने में डाकिया आओ और कक्का की चिट्ठी लियाओ।

हमने चिट्ठी खोली सो फिल्मी स्टाइल में शब्द धूंधरे और एक फोटू बीच में बोल रई।
चिट्ठी में लिखो तो –

काये रे कैसो है रे! मिमिक्री छोड़ दई का ? हम तो मजे में हैं अप्सराएं नच रयीं हैं हम बड़े बादल पे बैठत हैं। मनो यार इते रोज इते सैकड़ों आदमी आ रये हैं। भीड़ बढ़तै जा रयी है,,,, हमने धरती चेनल पे देखो कोरोना आओ है। अब तो सागर में भी दोन्द्रा मचाएं है सो सोची तुमाये हाल पूछ लये। जब से रोज रोज आदमी उते से इते आ रए हैं। इते हमोरें भी मास्क लगान लगे हैं। सेनेटाइजर तो तुम्हें पतै है हमाओ संगे चलत है। अच्छा सुनो नेंचें धरती पे जोन जोन की मूर्तिएँ लगीं हैं हमारो की उनखों बी मास्क लगा दो और अपनो ध्यान रखियो। मिमिक्री करो मोबाइल है अब तो सोश्यल मीडिया पे डारो खुद खुश रओ और दूसरों खों खुश करो। सुरक्षा रखो घरे रओ हसे खेले से सब ठीक होत है। बाकी बातें अबै हम फोन पे बता रये।

इतने दूर हो तो कोई बात बने, आर्टिस्ट सुनील चौबे

अच्छा बे दुकानों के सामने जो गोला बने बे तनक दूर दूर बनवाओ। आदमी जब तक जियो लाइन में लगो रओ अब मर गओ सो मरघटों में लाइन में लगो है। बड़ो दुख हो रओ भैया तुमोरों की सोच के। अब तो नियम रट गए हुइये अब का दिक्कत आ रयि मानबे खों। हमेशा की दूरी से दो ग़ज़ की दूरी अच्छी है। कबौं शकल ने देख – दिखा पाबे से अच्छो है मास्क लगा के आदो देखो दिखाओ।
जैसै नींद खुली गुरु ऐसो लगो जैसे दुगनी दम आगयी। एई से सबखों पड़वा रये हैं।

अपना ख्याल रखें सुरक्षित रहें

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